CG NEWS:क्या इस चौराहे की तरह “कन्फ्यूज़” है बिलासपुर का निज़ाम…? और “ऊठक – बैठक” में मस्त हैं हमारे नुमाइंदे…?

CG NEWS:( गिरिजेय ) पुराने जमाने में लोग किसी चौराहे – तिराहे का नाम खुद रख लेते थे। बिलासपुर शहर में भी उदई चौक, मन्नू चौक, उदल चौक, कोरोना चौक, गन्नी चौक, गजरा चौक, कंसा चौक, मध्य नगरी चौक जैसे कई मशहूर चौराहे हैं। किसी का पता – ठिकाना बताने या एक दूसरे से मिलने – जुलने के लिए चौक – चौराहे के ये यह नाम आज भी लोगों के बीच चलन में है। वक्त गुजरने के साथ चौक चौराहे का नामकरण सरकारी स्तर पर होने लगा है। लेकिन बिलासपुर शहर के मौजूदा निज़ाम की मेहरबानी है कि एक बार फिर बिलासपुरिया लोगों को किसी चौक के नामकरण का हक और मौका मिल गया।

जी हां…. ! उस्लापुर स्टेशन के ठीक पहले रेलवे ओवरब्रिज के पास नौकरशाही की मेहरबानी से मिले नए चौक का नामकरण आस पास रहने वाले लोगों कर दिया है और इसे “अचानक चौक या इच्छाधारी चौक” नाम दे दिया है । सरकारी सिस्टम की “नायाब़ काब़लियत” और “टेक्निकल नॉलेज़” की नुमाइश कर रहे इस चौराहे को देखकर किसी का भी मन करेगा कि वह दिल से तारीफ करें। दरअसल यह चौराहा बताता है कि जिस तरह मुंगेली रोड, मंगला चौक, नर्मदा नगर चौक या इस चौराहे से मिलने वाली एक ,दो ,तीन, चार, पांच  सड़कों की ओर से आने वाले लोग किधर से होकर जाना है या मुड़ना है – यह सोचकर “कंफ्यूज” रहते हैं । इसी तरह बिलासपुर का निजाम भी “कंफ्यूज” है। सही मायने में यह बिलासपुर शहर का सबसे बढ़िया चौराहा है, जो बिलासपुर के मौजूदा प्रशासन की सोच – समझ, दूरंदेशी, तकनीकी ज्ञान और बेहतर क्वालिटी  के निर्माण को प्रदर्शित कर रहा है ।

CG NEWS:क्या इस चौराहे की तरह “कन्फ्यूज़” है बिलासपुर का निज़ाम...? और “ऊठक – बैठक” में मस्त हैं हमारे नुमाइंदे...?

आईए समझ लेते हैं कि आसपास रहने वालों ने इसका नाम “अचानक चौक” क्यों रखा होगा। लोगों से बातचीत करें तो पता चलता है कि बिलासपुर के प्रशासन ने इस शहर को एक बेहतरीन सड़क दी है। मंगला चौक से उस्लापुर रेलवे ओवर ब्रिज तक काफी सकरी सड़क में आना जाना बहुत मुश्किल होता था।उस्लापुर स्टेशन सहित मुंगेली, कोटा ,तखतपुर इलाके से बड़ी तादाद में लोगों का आना-जाना इस रास्ते में होता है और यह सड़क सुबह से शाम तक गाड़ियों से भरी रहती है । जाहिर सी बात है कि इससे ट्रैफिक हमेशा तंग रहता था। बिलासपुर प्रशासन ने इस रोड पर अवैध कब्जा हटाया और एक बहुत पुरानी सड़क के बाजू में उससे भी चौड़ी सड़क बनाकर शहर को एक बढ़िया तोहफा दिया है । यह सड़क चौड़ी भी है सुंदर भी है और इसकी वजह से आने -जाने वालों को काफ़ी चौड़ी जगह मिल गई है। नई सड़क बनने के बाद रेलवे ओवरब्रिज के सामने के हिस्से में पांच ओर से रास्ते आकर मिल गए हैं। एक तो ओवरब्रिज की तरफ से आने वाला हिस्सा है ।उसके ठीक सामने मंगला चौक की ओर से आने वाली सड़क है । तीसरी सड़क ओवर ब्रिज के बाजू उस्लापुर स्टेशन की तरफ से आती है। उसके ठीक दूसरी ओर भी सड़क उस्लापुर स्टेशन की ओर जुड़ी हुई है। उसके बाद नर्मदा नगर की ओर से बनाई गई नई सड़क पेट्रोल पंप होते हुए इस जगह पर आकर मिलती है। लिहाज़ा इस जंक्शन  ने एक चौराहे का रूप ले लिया। इस तरह मोहल्ले के लोगों को अचानक ही एक चौराहा मिल गया। इस वजह से उन्होंने इसका नामकरण अब अचानक चौक कर दिया है ।

अब चलन में आ रहे दूसरे नाम की बात करते हैं। वह नाम है इच्छाधारी चौक… । इसे भी समझते हैं कि यह चौराहा बिलासपुर के सिस्टम का कैसा नायाब़ नमूना है। दरअसल इस चौक पर कई सड़के आकर मिलती है, उस चौराहे पर एक बड़ा गोला  (जिसे तकनीकी भाषा में रोटरी कहा जाता है ) बना दिया गया है। इस चौराहे को देखकर कोई भी शख्स सरकारी सिस्टम की तारीफ किए बिना नहीं रहता और एक छत्तीसगढ़ी कहावत याद आती है…. “फोकट के पाये… त मरत ले खाए……”।  इस कहावत को जमीन पर उतारते हुए जितनी मर्जी आई  उस  मनमर्जी  के हिसाब से ज़मीन का इस्तेमाल कर गोल घेरा बना दिया गया। अब इस चौक से जुड़ने वाली किसी भी सड़क की ओर से आ रहे व्यक्ति को यह समझ नहीं आता कि ट्रैफिक के नियम के मुताबिक उसे किस ओर से जाना है… या किस ओर घूमना है । ऐसी हालत में बिलासपुर प्रशासन की “डेढ़ होशियारी” को नमन करते हुए वह शख्स अपनी इच्छा को सम्मान देता है और जिधर उसकी इच्छा होती है उधर से आगे बढ़ता है या मुड़ जाता है…. ।सड़क पर चलने वाले लोगों की इच्छा का सम्मान करने वाले इस चौक का नाम शायद इस वजह से भी  “इच्छाधारी चौक ” रख दिया गया है।

CG NEWS:क्या इस चौराहे की तरह “कन्फ्यूज़” है बिलासपुर का निज़ाम...? और “ऊठक – बैठक” में मस्त हैं हमारे नुमाइंदे...?

करीब साल भर पहले शहर में कुछ बदलाव की उम्मीद के साथ लोगों ने अपने नुमाइंदे भी बदल दिए। फ़्रेम में नए चेहरे फ़िट हो गए । लेकिन बिलासपुर  का निज़ाम कुछ ऐसा है कि बदलाव के इस फैसले के बदले उसने शहर के लोगों को नई सड़क का भी तोहफा दिया और लोगों को चौक -चौराहे के नए नामकरण का सुनहरा मौका भी दे दिया है। बदलाव की इस पूरे सर्कल में जनता के बीच से चुने हुए नुमाइंदो का भी एक नया एक्सपेरीमेंट छिप नहीं पा रहा है। जो नौकरशाह और सरकारी सिस्टम पर इतना अटूट भरोसा करते है कि इस सड़क औऱ चौराहे से गुज़रते हुए कभी उन्हे इस बात का अहसास नहीं होता कि सिस्टम से भी कोई गलती हो सकती है। तभी तो किसी नेता ने कभी इस बारे में कुछ बोलने की ज़रूरत ही महसूस नहीं की। पार्षद से लेकर विधायक, सांसद, मंत्री तक हर एक नेता कोई आसमान में तो नहीं उड़ता । उन्हे भी सड़क नापना पड़ता है । लेकिन अकेले हों या सायरन बजाती हुई गाड़ियों में उनका काफ़िला सांय-सायं गुजर रहा हो…. इस अचानक बने इच्छाधारी चौक के पास पहुंचकर गोल-गोल घूमते हुए आगे बढ़ जाते हैं। शायद बदले हुए चश्मे के नंबर और कलर का असर है कि वे भी बिलासपुर के इस नए चौराहे की ओर से गुजरने वाले आमआदमी और बिलासपुर के निजाम की तरह खुद भी “कंफ्यूज” है। और बिलासपुर की तरक्की को इसी “कन्फ्यूजन” के साथ आगे बढ़ाते रहना उनकी मज़बूरी है। हमारे ही वोट से चुनकर आए हमारे नुमाइंदे सदाबहार हीरो देवानंद की बहुत  पुरानी फ़िल्म अमीर – गरीब के एक गाने – “चल बैठ जा…. बैठ गई…. चल खड़ी हो जा…. खडी हो गई….चल झूम जा…. झूम गई… चल घूम जा….. घूम गई…” की तर्ज़ पर नौकरशाही के इशारे के हिसाब से ऊठक – बैठक करने में ही आनंदित हैं और इस कसरत से ज़रिए अपनी सेहत बना रहे हैं। इधर मंगला चौक से ओवरब्रिज तक सड़क के दोनों किनारे पर शुभम् विहार से अल्का एवेन्यू और मिनोचा कॉलोनी तक बसे रहवासी  से लेकर इस रास्ते के राहगीर तक सभी “कन्फ़्यूज़न” में सराबोर  ट्रेफ़िक का नया पाठ पढ़ रहे हैं। शाबाश प्रशासन…. शाबाश जनप्रतिनिधि…!

मशहूर शायर शहाब जाफ़री से माफ़ी मांगते हुए उनकी लाइनों में फेरबदल कर अपने रहनुमाओं के लिए लिखना पड़ रहा है –

तू इधर-उधर की न बात कर,ये बता कि क्यूं है कन्फ्यूजन ?

मुझे रहज़नों से गिला तो है, पर तेरी रहबरी का सवाल है…..

 

बैगा आदिवासी को सीईओ ने कराया गृह प्रवेश...प्रस्तावित समारोह स्थल का किया निरीक्षण कहा...संदीप ने कहा..जल्द से जल्द पूरी करें तैेयारी

Related Articles